दिव्यांगो की पेंशन बढ़वाने सीएम को लिखूंगा पत्र : जीतू पटवारी
I will write a letter to the CM to increase the pension of the disabled: Jitu Patwari

हमारी सरकार बनने पर दिव्यांगों को देंगे तीन हजार : पीसीसी चीफ
सांसद आलोक शर्मा ने किया वादा पूरा नहीं किया, दिव्यांगों को नहीं मिली स्कूटी
सीहोर/भोपाल।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने अपने बंगले पर दिव्यांगों की आवाज उठाते हुए कहा कि दिव्यांगों की पेंशन बढ़वाने में सीएम को पत्र लिखूंगा। उन्होंने दिव्यांग कल्याण एवं विकास परिषद संपूर्ण भारत शाखा सीहोर, आष्टा के सदस्यों से वादा किया कि हमारी सरकार बनी तो 3000 रुपए पेंशन दिव्यांगों को दी जाएगी, लाड़ली बहना को 1500 रुपए मिल रहे है। यदि दिव्यांगों की पेंशन बढ़ेगी तो हम उसका स्वागत करेंगे, लेकिन यदि नहीं आई तो हम दिव्यांगों के हक की लड़ाई लडऩे में पीछे नहीं हटेंगे। हमारी सरकार आएगा तो दिव्यांगों के लिए रोजगार की योजना लाएंगे। बजट सत्र चल रहा है सरकार दिव्यांगों की पेंशन बढ़ाने पर ध्यान दे। दरअसल दिव्यांग कल्याण एवं विभाग परिषद संपूर्ण शाखा सीहोर, आष्टा के सदस्य पीसीसी चीफ से मिलने उनके बंगले पर पहुंचे थे।
प्रदेश प्रभारी कमलेश राठौर, उपाध्यक्ष हुकूम सिंह मेवाड, लखन सिंह विश्वकर्मा, मुकेश यादव ने कहा कि दिव्यांग कल्याण एवं विकास परिषद संपूर्ण भारत शाखा सीहोर सरकार से मांग करता है कि महंगाई के दौर में दिव्यांगों की पेंशन 600 रुपए दी जा रही है, जिससे हमारा भरण पोषण नहीं हो पा रहा है।
मुख्यमंत्री @drmohanyadav51 जी, आज प्रदेश के दिव्यांग परिजन मुझसे मिलने आए थे। उन्होंने अपनी पीड़ा साझा करते हुए बताया कि सरकार से मिलने वाली उनकी पेंशन कई वर्षों से मात्र ₹600 ही है।
आज के महंगाई भरे समय में ₹600 में किसी भी व्यक्ति के लिए जीवनयापन संभव नहीं है। ऐसे में… pic.twitter.com/mR906lGs8j
— Jitendra (Jitu) Patwari (@jitupatwari) February 18, 2026
दिव्यांगों की पेंशन आज के दौर में कम से कम पांच हजार रुपए महीने होना चाहिए। दूसरे राज्यों में मप्र से अधिक पेंशन दिव्यांगों को मिलती है। इसके साथ ही दिव्यांगों के नाम पर एनजीओ को फायदा पहुंचाया जा रहा है, जबकि हकीकत में दिव्यांगों को उपकरण नहीं मिल रहे है, सिर्फ दिव्यांगों की पहचान करने शिविर लगाए जाते है। दिव्यांगों को अन्य राज्यों की तरह स्कूटी प्रदान की जाए ताकि उनका सफर सुगम हो सके। दिव्यांगों को नौकरी नहीं मिल रही है। फर्जी दिव्यांग बनकर कई लोगों ने उनकी नौकरी छीन ली है। सीहोर जिला अस्पताल में दिव्यांगों को बैठने की जगह नहीं है नीचे बैठे रहते है, क्योंकि यहां आष्टा, बुधनी, अहमदपुर, भैरुंदा, शाहगंज से दिव्यांग प्रमीण पत्र बनवाने आते है। लेकिन डॉक्टरों और डीडीआरसी द्वारा प्रमाण पत्र और यूडीआईडी कार्ड के लिए बार-बार चक्कर लगवाया जाता है। इसलिए तहसील स्तर पर दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाने की सुविधा शुरू हो।
सांसद ने नहीं निभाया वादा
राठौर, मुकेश यादव ने कहा कि सीहोर सांसद आलोक शर्मा ने दिव्यांगों से किया एक भी वादा नहीं निभाया। उन्होंने दिव्यांगों से वादा किया था कि हर माह आप से मिलने आऊंगा,दिव्यांगों के साथ फोटो खिचाने के लिए उनसे वादा किया था कि आपकी समस्याओं को हल करवाने सीएम और पीएम से मिलवाऊंगा लेकिन इसके बाद उन्होंने दिव्यांगों से दूरी बना ली। उन्होंने कहा था कि दिव्यांगों को रोजगार के लिए छोटा-मोटा उद्योग लगवाने सीएम डॉ.. मोहन यादव से बात करूंगा, लेकिन उन्होंने एक भी वादा नहीं निभाया। उन्होंने 80 प्रतिशत वाले दिव्यांगों को स्कूटी देने का वादा किया था, लेकिन एक भी स्कूटी नहीं दी। भाजपा के जनप्रतिनिधियों ने दिव्यांगों का साथ नहीं दिया।
प्रधानमंत्री आवास योजना में विवाहित पात्रता को हटाया जाए क्योंकि कई दिव्यांगों की शादी नहीं होती है तो उन्हें आवास योजना का लाभ नही ंमिल पाता है। इसलिए शादी और बिना शादी दोनों को आवास योजना का लाभ दिया जाए। विशेष भर्ती अभियान को फिर से चालू किया जाए। जिस प्रकार पोस्टऑफिस के द्वारा ऑनलाइन फार्म भरवाकर मैरिट भर्ती की जाती है उसी पैटर्न पर मप्र में हो रहा विशेष भर्ती अभियान सभी विभागों के पद संकल्ति कर ग्रेडवार एक पोर्टल के माध्यम से पोस्ट आफिस की तरह ऑनलाइन फार्म भरवाकर उनकी मेरिट सूची के अनुसार अंक दिया जाए। जिससे एक पोर्टल के माध्यम से दिव्यांगों को अपनी योग्यता के अनुसार किसी एक विभाग में चयनित होने का अवसर मिलेगा। जिससे कालाबाजारी कम होगी।


